Titanic जहाज के डूबने की असली सच्चाई | Truth About Titanic Explained In Hindi

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हेलो दोस्तों आज हम जानेंगे Titanic जहाज के डूबने की असली सच्चाई | Truth About Titanic Explained In Hindi आखिर किन कारणों की वजह से कभी नहीं डूबा जाने वाला जहाज “टाइटैनिक” कैसे समुंद्र की गहराई में समा गया।

कहते हैं ना भगवान द्वारा बनाई गई कुदरत से खिलवाड़ करने का नतीजा बहुत ही खतरनाक होता है बस ऐसा ही हाल टाइटैनिक के साथ हुआ।

Titanic जहाज एक कभी नहीं डूबने वाला जहाज था और इसे खासकर इसी लिए बनाया गया था। इसको बनाने वाले (Thomas Andrews) ने इसका नाम ही रखा था “THE UNSINKABLE SHIP” यह कभी नहीं पानी में डूब सकता मगर कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। Titanic जहाज अपनी पहली यात्रा के दौरान 14 अप्रैल 1912 की रात को उत्तर अटलांटिक महासागर में एक हिमखंड से टकराकर दो टुकड़ों में टूट गया और नहीं डूबा जाने वाला टाइटैनिक जहाज कुछ ही समय बाद पूरी तरह से पानी में डूब गया। चलिए जानते हैं।

Titanic जहाज के डूबने की असली सच्चाई:-

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1. The White Star Line’s कंपनी ने 17 सितंबर 1908 को टाइटैनिक जहाज बनाने का जिम्मा “Harland and Wolff” कंपनी को दिया था। इसके बाद “Harland and Wolff” कंपनी ने 31 मार्च 1909 को टाइटैनिक जहाज बनाने का काम शुरू कर दिया और यह काम उन्होंने कुल 26 महीने की कड़ी मेहनत और मशक्कत के बाद आखिरकार 31 मई 1911 को दुनिया का सबसे बड़ा जहाज बना कर खड़ा कर दिया।

Titanic जहाज देखने में काफी विशाल था इस बात से आप इसका अनुमान लगा सकते हैं अगर Titanic जहाज को खड़ा कर दिया जाता तो यह उस समय की 7 मंजिलें इमारत भी इसके सामने कुछ नहीं लगती । यह काम करीब 3 हजार कर्मचारियों के सहयोग के साथ कर दिखाया और इसे बनाने में 2 लोगों की जान भी चली गई। इसे बनाने में कुल निवेश राशि 7.5 million डॉलर था। उस समय की राशि को आज के समय की राशि से तुलना करें तो आज यह राशि करीबन 150 million डॉलर होगा।

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2. Titanic जहाज बनने के ठीक अगले वर्ष ही 10 अप्रैल 1912 को यह अपने सफर के लिए तैयार हो गया। करीब 2200 यात्रियों और क्रू मेंबर को लेकर यह इंग्लैंड के साउथहैम्पटन से अमेरिका के न्यूयार्क सिटी के लिए रवाना हो गया। पहले 2 दिन इसका सफर उत्तरी अटलांटिक महासागर में सही ढंग से था मगर अचानक से मौसम परिवर्तन के वजह से उत्तरी अटलांटिक महासागर में भीषण पानी के ऊंचे-ऊंचे बवंडर बनने लग गए मगर इस भीषण बवंडर से किसी भी तरह की कोई क्षति Titanic जहाज को नहीं हुई मगर आगे का रास्ता अब देखना थोड़ा मुश्किल हो चुका था क्योंकि हर जगह अब धुंध ही धुंध नजर आ रहे थे।

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3. 14 अप्रैल 1912 को Titanic जहाज अपने तय रूट और तय समय के साथ सफर कर रहा था मगर जहाज में बैठे लोगों को यह नहीं मालूम था कि आज यह उनका आखरी सफर होगा। रात के 10:00 बजे अचानक फिर से वही भीषण बवंडर उत्तरी अटलांटिक महासागर में आ गया देखते ही देखते फिर से यह एक ऊंचे बवंडर का रूप धारण कर लिया। यह देख “Edward Smith” जोकि उस वक्त Titanic जहाज के कप्तान थे वह बहुत ही बुरी तरह से डर गए और जहाज को धीमा कर दिया क्योंकि धुंध के कारण आगे का रास्ता कुछ स्पष्ट नजर नहीं आ रहा था।

यह बात उन्होंने Titanic जहाज के मालिक “J. Bruce Ismay” को बताया मगर मालिक “J. Bruce Ismay” ने “Edward Smith” को जहाज तेज गति से चलाने के लिए बोला बस यही एक गलती सभी विनाश का कारण हुई।

Titanic जहाज के डूबने की असली सच्चाई | Truth About Titanic Explained In Hindi

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4. Titanic जहाज जब अपने सफर के लिए रवाना हुआ था तब इसके पहुंचने की तारीख तय थी। तब इसकी गति 25km/hr की थी मगर सफर के दूसरे दिन ही तेज तूफान और बवंडर की वजह से सफर थोड़ा धीमा हो गया और 1 दिन की देरी और हो गई जिसके वजह से अमेरिका के न्यूयार्क सिटी Titanic जहाज थोड़ी दिन के बाद पहुंचता मालिक “J. Bruce Ismay” को यह अच्छा नहीं लगा। इसी वजह से जब 14 अप्रैल 1912 की रात को 10:00 बजे भीषण बवंडर आया तब Titanic जहाज के मालिक “J. Bruce Ismay” ने “Edward Smith” को जहाज तेज गति से चलाने के लिए बोला “Edward Smith” ने Titanic जहाज की गति 43km/hr कर दिया।

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5. Titanic जहाज पहले 1 घंटे तूफान के बीच काफी अच्छे से चला मगर तूफानी काली रात के वजह से “Edward Smith” को आगे का सफर अच्छे से दिखाई नहीं दे रहा था। रात 11:20 को एक के बाद एक अचानक से 6 बड़े-बड़े बर्फ की चट्टानों की चेतावनिया कप्तान “Edward Smith” को मिली। जब तक वह कुछ समझ पाते Titanic जहाज की रफ्तार इतनी ज्यादा तेज थी कि उसे अचानक से रोकना लगभग असंभव था इसलिए “Edward Smith” ने जल्दबाजी में Titanic जहाज को दाएं घुमाया और वह एक बड़े हिमखंड से टकराने से बच गए मगर अभी उनके सामने और ऐसी 5 बड़े-बड़े बर्फ की चट्टाने थी।

देखते ही देखते वह लगभग सभी हिमखंड को अपनी सूझबूझ से पार करा पाए मगर वह अपना रास्ता तय किए गए रूट से थोड़ा भटक चुके थे। कुछ दूर जाने के बाद ही लगभग 11:40 को एक और बड़े हिमखंड के होने की आपातकालीन सूचना मिली मगर इस बार जब तक “Edward Smith” कुछ समझ पाते तब तक Titanic जहाज उस हिमखंड से जा टकराया। टकराने का प्रभाव इतना तेज गति का था की Titanic जहाज दो हिस्सों में टूट गया।

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6. Titanic जहाज में सफर कर रहे कुल 2200 यात्रियों और क्रू मेंबर्स के बीच अफरा-तफरी मच गई सब अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे और Titanic जहाज धीरे धीरे उत्तर अटलांटिक महासागर की गहराई में शमाता जा रहा था। कुछ लोग जान बचाने के लिए Titanic जहाज से समुंद्र में कूद गए मगर समुद्र के पानी का तापमान -2℃ था। जिसके कारण डूबने वालों की मौत ठंड के कारण 5 मिनट के अंदर ही हो गई। Titanic जहाज में कुल 20 lifeboats थी। एक लाइफबोट्स में कुल 58 यात्री सवार हो सकते थे।

ऐसे में 2000 लोगों को बचाना लगभग असंभव था और जिस जगह Titanic जहाज का हादसा हुआ था वहां से जमीन 640km की दूर पर थी। मतलब साफ था की Titanic जहाज में सफर कर रहे यात्रियों को बचाने के लिए तत्काल कोई टीम नहीं आएगी। ऐसे में जो बच्चे और महिला थे उन्हें जल्दी-जल्दी लाइफबोट्स पर बैठा दिया गया और जो क्रू मेंबर्स थे और Titanic जहाज पर बचे रह गए यात्री जो थे उन्होंने अपने अंतिम समय में एक साहस का प्रमाण दिया।

सब मिलकर एक गाने का धुन दोहराने लगे और अपनी अंतिम समय को अच्छे से देखते रहे करीब ढाई घंटे बाद तक़रीबन 2:20 को Titanic जहाज पूरी तरह से उत्तर अटलांटिक महासागर की गहराइयों में समा गया।

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7.Titanic जहाज के डूबने के बाद काफी दिनों तक खोजकर्ताओ की टीम लगातार Titanic जहाज को ढूंढती रही मगर Titanic जहाज का कोई भी नामोनिशान तक नहीं मिला। करीब 6 महीने खोजकर्ताओ की टीम उत्तर अटलांटिक महासागर की गहराइयों में खोजती रही मगर कोई सबूत नहीं मिला और देखते ही देखते 73 साल बीत गए। 1 सितंबर 1985 को एक संयुक्त अमेरिकी-फ्रांसीसी अभियान चलाया गया।

इस अभियान में अमेरिका के महान प्रसिद्ध समुद्री वैज्ञानिक “Dr. Robert Ballard” शामिल थे और इस अभियान से आखिरकार Titanic जहाज समुद्र की 13,000 फीट की गहराइयों में मिल ही गया। Titanic जहाज की दशा बद से बदतर हो गई थी। Titanic जहाज को जीवाणु ने पूरा खोखला कर दिया था और आज भी Titanic जहाज इसी दशा में उत्तर अटलांटिक महासागर की गहराइयों में पड़ा हुआ है। आने वाले वक्त में लगभग 10 से 20 सालों के अंदर Titanic जहाज को जीवाणु पूरा खत्म कर देंगे और आने वाली पीढ़ी को Titanic जहाज का कोई अस्तित्व ही नहीं मिलेगा देखने को।

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आप लोगों से मेरा एक सवाल है क्या Titanic जहाज को उत्तर अटलांटिक महासागर की गहराइयों से निकालना चाहिए ??

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